DPDP enforcement deadline: May 2027Rules notified Nov 2025Penalty exposure up to ₹250 Cr
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Quick Answer

DPDP अधिनियम, 2023 के तहत आप — यानी वह व्यक्ति जिसका डेटा प्रोसेस होता है — एक डेटा प्रिंसिपल हैं, और आपको कई अधिकार मिलते हैं। धारा 11 आपको यह जानने का अधिकार देती है कि आपका कौन-सा डेटा प्रोसेस हो रहा है; धारा 12 सुधार और मिटाने का अधिकार देती है; धारा 13 शिकायत निवारण का अधिकार देती है; और धारा 14 आपकी मृत्यु या अक्षमता की स्थिति में किसी को नामित करने का अधिकार देती है। इन अधिकारों का प्रयोग करने के लिए आप पहले संबंधित कंपनी के शिकायत अधिकारी से संपर्क करते हैं, और असंतुष्ट होने पर डेटा संरक्षण बोर्ड में शिकायत कर सकते हैं।

डेटा प्रिंसिपल के रूप में आपके अधिकार — धारा 11 से 14

DPDP अधिनियम, 2023 आपको अपने व्यक्तिगत डेटा पर असली अधिकार देता है। जानें आपके पास कौन-से अधिकार हैं और उन्हें कैसे इस्तेमाल करें।

जानें कौन-सा अधिकार आपके काम आएगा

अपने डेटा अधिकारों का प्रयोग कैसे करें

डेटा प्रिंसिपल के रूप में आपके पास वास्तव में कौन-से अधिकार हैं?

DPDP अधिनियम, 2023 भारतीय नागरिकों को अपने व्यक्तिगत डेटा पर ठोस, प्रवर्तनीय अधिकार देता है। धारा 11 के तहत आप किसी भी कंपनी से यह जानने का अधिकार रखते हैं कि वह आपका कौन-सा डेटा रखती है और किसके साथ साझा करती है। धारा 12 आपको ग़लत डेटा सुधारने और अनावश्यक डेटा मिटाने का अधिकार देती है। धारा 13 शिकायत निवारण सुनिश्चित करती है, और धारा 14 आपको अपनी अनुपस्थिति के लिए किसी को नामित करने देती है।

इन अधिकारों की ख़ास बात यह है कि ये सिर्फ़ कागज़ पर नहीं हैं — डेटा संरक्षण बोर्ड ऑफ़ इंडिया के पास कंपनियों पर ₹250 करोड़ तक जुर्माना लगाने की शक्ति है। इसका मतलब है कि कंपनियों को आपके अनुरोधों को गंभीरता से लेना होगा। निति भारत कंपनियों को इन अधिकार-अनुरोधों को सही ढंग से संभालने की व्यवस्था बनाने में मदद करता है ताकि वे अनुपालन में रहें।

अगर कोई कंपनी आपके अनुरोध को अनदेखा कर दे तो क्या करें?

अगर कोई डेटा फ़िड्युशरी आपके वैध अधिकार-अनुरोध का जवाब नहीं देता या असंतोषजनक जवाब देता है, तो आपका पहला कदम उनके शिकायत अधिकारी को लिखित रूप में औपचारिक शिकायत भेजना है। इसका रिकॉर्ड रखें। अगर वे फिर भी हल न करें, तो आप डेटा संरक्षण बोर्ड ऑफ़ इंडिया में शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जो एक डिजिटल-फ़र्स्ट प्रक्रिया है।

व्यवसायों के दृष्टिकोण से, अधिकार-अनुरोधों को समय पर और व्यवस्थित रूप से संभालना अब एक अनिवार्य क्षमता है, न कि वैकल्पिक। निति भारत की फ़िक्स्ड-प्राइस DPDP सेवाएँ (₹75,000 से ₹3.2 लाख) कंपनियों को अधिकार-अनुरोध संभालने की एक कार्यशील, ऑडिट-योग्य प्रक्रिया बनाने में मदद करती हैं।

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किसी भी कंपनी को भेजने के लिए तैयार अधिकार-अनुरोध पत्रों का एक सेट — जानकारी, सुधार, मिटाने और शिकायत के लिए, साथ में एस्केलेशन गाइड।

Frequently Asked Questions

डेटा प्रिंसिपल कौन होता है?+
डेटा प्रिंसिपल वह व्यक्ति है जिसका व्यक्तिगत डेटा प्रोसेस किया जा रहा है — यानी आप, एक ग्राहक, उपयोगकर्ता या कर्मचारी के रूप में। बच्चों के मामले में उनके माता-पिता या अभिभावक डेटा प्रिंसिपल की भूमिका निभाते हैं।
क्या मैं किसी कंपनी से अपना डेटा मिटाने के लिए कह सकता हूँ?+
हाँ, धारा 12 के तहत आप अपना डेटा मिटाने के लिए कह सकते हैं जब उसे रखने का कोई वैध या कानूनी कारण न हो। हालाँकि, अगर किसी कानून के तहत डेटा रखना अनिवार्य है, तो कंपनी उतने डेटा को रोक सकती है।
अधिकार-अनुरोध का जवाब देने में कंपनी को कितना समय लगता है?+
कंपनी को उचित और समयबद्ध तरीक़े से जवाब देना होता है, जैसा DPDP नियम, 2025 में निर्धारित है। अगर वे उचित समय में जवाब न दें, तो आप बोर्ड में शिकायत कर सकते हैं।
क्या इन अधिकारों का प्रयोग निःशुल्क है?+
हाँ, अपने बुनियादी डेटा अधिकारों का प्रयोग आमतौर पर निःशुल्क है। कंपनियों को उचित सीमा में इन अनुरोधों को बिना शुल्क के संभालना होता है।

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