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Quick Answer

DPDP अधिनियम, 2023 के तहत सहमति प्रबंधक (Consent Manager) एक पंजीकृत मध्यस्थ है, जिसके ज़रिए एक डेटा प्रिंसिपल अलग-अलग कंपनियों को दी गई अपनी सहमति को एक ही जगह से दे, प्रबंधित और वापस ले सकता है। ज़्यादातर सामान्य कंपनियों के लिए सहमति प्रबंधक बनना अनिवार्य नहीं है — यह एक विशेष, पंजीकृत भूमिका है। लेकिन हर डेटा फ़िड्युशरी को अपनी अंदरूनी सहमति व्यवस्था मज़बूत रखनी चाहिए, चाहे वह किसी सहमति प्रबंधक के साथ एकीकृत हो या न हो। यह टूल स्पष्ट करता है कि आपकी स्थिति में क्या ज़रूरी है।

क्या आपको सहमति प्रबंधक (Consent Manager) चाहिए?

सहमति प्रबंधक बनना और सहमति प्रबंधक का उपयोग करना — दोनों अलग बातें हैं। जानें DPDP अधिनियम, 2023 के तहत आपकी स्थिति में क्या ज़रूरी है।

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सहमति और सहमति प्रबंधक के बारे में मुख्य बातें

सहमति प्रबंधक (Consent Manager) वास्तव में क्या है?

DPDP अधिनियम, 2023 में सहमति प्रबंधक एक विशेष, पंजीकृत मध्यस्थ है जो डेटा प्रिंसिपल को एक ही, इंटरऑपरेबल मंच से अपनी सहमति देने, प्रबंधित करने, समीक्षा करने और वापस लेने की सुविधा देता है। यह भारतीय डेटा-संरक्षण ढाँचे का एक अनूठा तत्व है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सहमति प्रबंधक बनना अधिकांश कंपनियों का दायित्व नहीं है — यह एक भरोसेमंद, बोर्ड-पंजीकृत भूमिका है जिसके साथ विशिष्ट पात्रता शर्तें जुड़ी हैं।

कई कंपनियाँ इस शब्द को लेकर भ्रमित हो जाती हैं और सोचती हैं कि उन्हें कोई सहमति-प्रबंधक तकनीक ख़रीदनी या बनानी होगी। असल में, ज़्यादातर व्यवसायों की ज़िम्मेदारी सरल है — अपनी अंदरूनी सहमति-संग्रह व्यवस्था को DPDP-अनुरूप बनाना। निति भारत इस अंतर को स्पष्ट करने और आपकी वास्तविक ज़िम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

एक डेटा फ़िड्युशरी की असली सहमति-ज़िम्मेदारी क्या है?

एक सामान्य डेटा फ़िड्युशरी के लिए, असली काम एक ऐसी सहमति व्यवस्था बनाना है जो धारा 6 की कसौटी पर खरी उतरे — यानी सहमति स्वतंत्र, विशिष्ट, सूचित, बिना-शर्त और स्पष्ट पुष्टि के साथ हो। हर उद्देश्य के लिए अलग सहमति, कोई पहले से टिका बॉक्स नहीं, और सहमति वापस लेने का उतना ही आसान तरीक़ा — ये मूल आवश्यकताएँ हैं। इसके साथ, सहमति के दिनांकित रिकॉर्ड रखना भी ज़रूरी है ताकि आप उन्हें प्रमाणित कर सकें।

कमज़ोर या बंडल की गई सहमति एक बड़ा जोखिम है, क्योंकि इससे आपका पूरा प्रोसेसिंग-आधार अवैध हो सकता है। निति भारत की फ़िक्स्ड-प्राइस सेवाएँ (₹75,000 से ₹3.2 लाख) आपके सहमति फ़्लो, रिकॉर्ड और नोटिस को एक सुसंगत, ऑडिट-योग्य सेट के रूप में तैयार करती हैं।

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एक व्यावहारिक चेकलिस्ट जो बताती है कि DPDP-अनुरूप सहमति व्यवस्था में क्या-क्या होना चाहिए, और सहमति प्रबंधक के बारे में मिथक बनाम वास्तविकता।

Frequently Asked Questions

क्या हर कंपनी को सहमति प्रबंधक बनना ज़रूरी है?+
नहीं। सहमति प्रबंधक बनना एक विशेष, बोर्ड-पंजीकृत भूमिका है जिसमें कड़ी पात्रता शर्तें हैं। अधिकांश कंपनियों को केवल अपनी अंदरूनी सहमति व्यवस्था DPDP-अनुरूप रखनी होती है।
सहमति प्रबंधक बनने के लिए क्या शर्तें हैं?+
DPDP नियम, 2025 के तहत सहमति प्रबंधक को बोर्ड के पास पंजीकृत होना और भारत में निगमन, न्यूनतम नेट-वर्थ, तकनीकी क्षमता और साख जैसी शर्तें पूरी करनी होती हैं। यह एक विस्तृत मूल्यांकन का विषय है।
क्या सहमति प्रबंधक का उपयोग करना मेरी सहमति-ज़िम्मेदारी ख़त्म कर देता है?+
नहीं। किसी पंजीकृत सहमति प्रबंधक के साथ एकीकरण भविष्य में एक विकल्प हो सकता है, लेकिन डेटा फ़िड्युशरी के रूप में वैध सहमति सुनिश्चित करने की मूल ज़िम्मेदारी आपकी ही रहती है।
एक व्यक्ति के रूप में मुझे सहमति प्रबंधक से क्या लाभ है?+
यह आपको विभिन्न कंपनियों को दी गई अपनी सहमति को एक ही जगह से देखने, प्रबंधित करने और वापस लेने की सुविधा देता है, जिससे आपका डेटा-नियंत्रण आसान हो जाता है।

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